Wp/anp/आकाशगंगा

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आकाशगंगा तारा के समूह सँ बनलौ गुच्छा छेकै।

आकाशगंगा के नीचे खड़ी एक महिला - कैलिफोर्निया में लिया गया एक चित्र

आकाश गंगा या क्षीरमार्ग वू आकाशगंगा (गैलेक्सी) के नाँव ठेकै, जेकरा मँ आपनौ सौर मण्डल स्थित छै। आकाशगंगा आकृति मँ एगो सर्पिल (स्पाइरल) गैलेक्सी छेकै, जेकरौ एगो बड़ौ केंद्र छै आरू ओकरा सँ निकलते बहुत्ते वक्र भुजा। आपनो सौर मण्डल एकरो शिकारी-हन्स भुजा (ओरायन-सिग्नस भुजा) प स्थित छै। क्षीरमार्ग मेँ १०० अरब सँ ४०० अरब के बीच तारा छै आरू अनुमान लगैलो जाय छै कि लगभग ५० अरब ग्रह को होय के संभावना छै, जेकरा मँ सँ ५० करोड़ अपनो तारा सिनी सँ 'जीवन-योग्य तापमान' के दूरी पर छै।[1] सन् २०११ मँ होय वाला एगो सर्वेक्षण मँ ई संभावना पैलो गेलो छै कि ई अनुमान सँ अधिक ग्रह होतै - ई अध्ययन के अनुसार, क्षीरमार्ग मँ तारों के संख्या सँ दुगना ग्रह हुअय सकै छै।[2] आपनो सौर मण्डल आकाशगंगा के बाहरी इलाक़ा मँ स्थित छै आरू ओकरौ केंद्र के परिक्रमा करी रहलो छै। एकरा एक पूरा परिक्रमा करै मँ लगभग २२.५ सँ २५ करोड़ वर्ष लगी जाय छै ।

नाँवEdit

संस्कृत आरू बहुत अन्य भाषा मँ आपनो गैलॅक्सी क "आकाशगंगा" कहलो जाय छै, जेकरा मँ आपना सब रहै छियै । धरती जहाँ अपना सिनी रहै छियै आरू एकरा सँ ही मिलता-जुलता एगो आरू ग्रह मंगल ग्रह जेकरा प अभी वैज्ञानिको के खोज चली रहलो छै, जहाँ कि हवा आरू पानी के खोज होय चुकलो छै आरू वैज्ञानिको के कहना छै कि भविष्य मँ ई हमरो नया ग्रह होतै। धरती केरौ अंत होला के बाद मानव वहीं पर रहै वाला छै ।[3][4] पुराणो मँ आकाशगंगा आरू पृथ्वी पर स्थित गंगा नदी क एक दोसरा के जोड़ा मानलौ जाय छेलै आरू दूनू क पवित्र मानलो जाय छेलै। प्राचीन हिन्दू धार्मिक ग्रंथौ मँ आकाशगंगा क "क्षीर" (यानि दूध) बोललौ गेलो छै।[5] भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर भी दोसरो सभ्यता सिनी क आकाशगंगा दूधिया लगलै। "गैलॅक्सी" शब्द केरौ मूल यूनानी भाषा के "गाला" (γάλα) शब्द छेकै जेकरो अर्थ भी दूध होय छै। फ़ारसी, संस्कृत जैसनो ही एगो हिन्द-ईरानी भाषा छेकै, ई लेली ओकरो "दूध" लेली शब्द संस्कृत केरो "क्षीर" सँ मिलता-जुलता सजातीय शब्द "शीर" छेकै आरू आकाशगंगा क "राह-ए-शीरी" (Template:Wp/anp/Nastaliq) बोलैलो जाय छेलै। अंग्रेजी में आकाशगंगा को "मिल्की वे" (Milky Way) बुलाया जाता है, जिसका अर्थ भी "दूध का मार्ग" ही है।

कुछ पूर्वी एशियाई सभ्यताओं ने "आकाशगंगा" शब्द की तरह आकाशगंगा में एक नदी देखी। आकाशगंगा को चीनी में "चांदी की नदी" (銀河) और कोरियाई भाषा में भी "मिरिनाए" (미리내, यानि "चांदी की नदी") कहा जाता है।

आकारEdit

आकाशगंगा एक सर्पिल (अंग्रेज़ी में स्पाइरल) गैलेक्सी है। इसके चपटे चक्र का व्यास (डायामीटर) लगभग १,००,००० (एक लाख) प्रकाश-वर्ष है लेकिन इसकी मोटाई केवल १,००० (एक हज़ार) प्रकाश-वर्ष है।[6] आकाशगंगा कितनी बड़ी है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है के अगर हमारे पूरे सौर मण्डल के चक्र के क्षेत्रफल को एक रुपये के सिक्के जितना समझ लिया जाए तो उसकी तुलना में आकाशगंगा का क्षेत्रफल भारत का डेढ़ गुना होगा।

अंदाज़ा लगाया जाता है के आकाशगंगा में कम-से-कम १ खरब (यानि १०० अरब) तारे हैं, लेकिन संभव है कि यह संख्या ४ से ५ खरब (यानि ४०० से ५०० अरब) तक हो।[7][8] तुलना के लिए हमारी पड़ोसी गैलेक्सी एण्ड्रोमेडा में १० खरब तारे हो सकते हैं।[9] एण्ड्रोमेडा का आकार भी सर्पिल है। आकाशगंगा के चक्र की कोई ऐसी सीमा नहीं है जिसके बाद तारे एकदम न हों, बल्कि सीमा के पास तारों का घनत्व धीरे-धीरे कम होता जाता है। देखा गया है के केंद्र से ४०,००० प्रकाश वर्षों की दूरी के बाद तारों का घनत्व तेज़ी से कम होने लगता है। वैज्ञानिक इसका कारण अभी ठीक से समझ नहीं पाए हैं। मुख्य भुजाओं के बाहर एक अन्य गैलेक्सी से अरबो सालों के काल में छीने गए तारों का छल्ला है, जिसे इकसिंगा छल्ला (मोनोसॅरॉस रिन्ग) कहते हैं। आकाशगंगा के इर्द-गिर्द एक गैलेक्सीय सेहरा भी है, जिसमें तारे और प्लाज़्मा गैस कम घनत्व में मौजूद है, लेकिन इस सेहरे का आकार आकाशगंगा की दो मॅजलॅनिक बादल (Magellanic Clouds) नाम की उपग्रहीय गैलेक्सियों के कारण सीमित है।

भुजाएँEdit

क्योंकि मानव आकाशगंगा के चक्र के भीतर स्थित हैं, इसलिए हमें इसकी सही आकृति का अचूक अनुमान नहीं लगा पाए हैं। हम पूरे आकाशगंगा के चक्र और उसकी भुजाओं को देख नहीं सकते। हमें हज़ारों अन्य गैलेक्सियों का पूरा दृश्य आकाश में मिलता है जिस से हमें गैलेक्सियों की भिन्न श्रेणियों का पता है। आकाशगंगा का अध्ययन करने के बाद हम केवल अनुमान लगा सकते हैं के यह सर्पिल श्रेणी की गैलेक्सी है। लेकिन यह पता लगाना बहुत कठिन है के आकाशगंगा की कितनी मुख्य और कितनी क्षुद्र भुजाएँ हैं। ऊपर से यह भी देखा गया है के अन्य सर्पिल गैलेक्सियों में भुजाएँ कभी-कभी अजीब दिशाओं में मुड़ी हुई होती हैं या फिर विभाजित होकर उपभुजाएँ बनती हैं।[10][11][12] इन पेचीदगियों की वजह से वैज्ञानिकों में भुजाओं के आकार को लेकर मतभेद है। २००८ तक माना जाता था के आकाशगंगा की चार मुख्य भुजाएँ हैं और कम-से-कम दो छोटी भुजाएँ हैं, जिनमें से एक शिकारी-हन्स (या ओरायन-सिग्नस) भुजा है जिसपर हमारा सौर मंडल स्थित है। दाएँ पर स्थित एक चित्र में विभिन्न भुजाएँ अलग-अलग रंगों में दर्शाई गयी हैं -

रंग भुजा या भुजाएँ
नीला परसीयस भुजा
जमुनी नोरमा भुजा और बाहरी भुजा
हरा स्कूटम-सॅन्टॉरस भुजा
गुलाबी कैरीना-सैजीटेरियस भुजा
कम-से-कम दो अन्य छोटी भुजाएँ भी हैं, जिनमें से एक यह है:
नारंगी ओरायन-सिग्नस भुजा (जिसमें सूरज और सौर मण्डल मौजूद हैं)

२००८ में विस्कोंसिन विश्वविद्यालय के रॉबर्ट बॅन्जमिन ने अपने अनुसंधान का नतीजा घोषित करते हुए दावा किया के दरअसल आकाशगंगा की केवल दो मुख्य भुजाएँ हैं - परसीयस भुजा और स्कूटम-सॅन्टॉरस भुजा - और बाक़ी सारी छोटी भुजाएँ हैं। अगर यह सच है तो आकाशगंगा का आकार एण्ड्रोमेडा से अलग और ऍन॰जी॰सी॰ १३६५ नाम की सर्पिल गैलेक्सी जैसा होगा।[13][14]

बनावटEdit

१९९० के दशक तक वैज्ञानिक समझा करते थे के आकाशगंगा का घना केन्द्रीय भाग एक गोले के अकार का है, लेकिन फिर उन्हें शक़ होने लगा के उसका आकार एक मोटे डंडे की तरह है।[15] २००५ में स्पिट्ज़र अंतरिक्ष दूरबीन से ली गयी तस्वीरों से स्पष्ट हो गया के उनकी आशंका सही थी: आकाशगंगा का केंद्र वास्तव में गोले से अधिक खिंचा हुआ एक डंडेनुमा आकार निकला।[16]

आयुEdit

२००७ में आकाशगंगा में एक "एच॰ई॰ १५२३-०९०१" नाम के तारे की आयु १३.२ अरब साल अनुमानित की गयी, इसलिए आकाशगंगा कम-से-कम उतना पुराना तो है ही।

उपग्रहीय गैलेक्सियाँEdit

दो गैलेक्सियाँ, जिन्हें बड़ा और छोटा मॅजलॅनिक बादल कहा जाता है, आकाशगंगा की परिक्रमा कर रहीं हैं।[17] आकाशगंगा की और भी उपग्रहीय गैलेक्सियाँ हैं।

इन्हें भी देखेंEdit

सन्दर्भEdit

  1. Lua error in package.lua at line 80: module 'Module:Wp/anp/Citation/CS1/Suggestions' not found.
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  3. A M T Jackson, R.E. Enthoven (1989). Folk Lore Notes. Asian Educational Services. ISBN 8120604857. ... According to the Puranas, the milky way or akashganga is the celestial River Ganga which was brought down by Bhagirath ...

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  4. Hormusjee Shapoorjee Spencer (1965). The Aryan ecliptic cycle: glimpses into ancient Indo-Iranian religious history from 25628 B.C. to 292 A.D. H.P. Vaswani. ... There are two "Gangas"—one terrestrial and the other "akashic" or celestial ... bear reference only to the "Akash Ganga" which is the Milky Way ...

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  5. Edward C. Sachau (2001). Alberuni's India: an account of the religion, philosophy, literature, geography, chronology, astronomy, customs, laws and astrology of India about A.D. 1030. Routledge. ISBN 9780415244978. ... revolves around Kshira, i.e. the Milky Way ...

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  11. Template:Wp/anp/Cite arxiv
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श्रेणी:आकाशगंगा श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना श्रेणी:कॉमन्स पर निर्वाचित चित्र युक्त लेख


एकरो देखॉEdit